कार्यकारी उपाध्यक्ष संदेश

हरियाणा को भारतीय संस्कृति की उद्गम स्थली कहा जाता है। यह सर्वमान्य है कि भारतीय संस्कृति के आधार ग्रंथों की रचना इसी प्रदेश के वन प्रांतर से बहने वाली सरस्वती नदी के पावन किनारों पर हुई। मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों को उद्घाटित करने वाले अमर ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता की जन्म स्थली होने का गौरव भी इसी प्रदेश को प्राप्त है। गौरवशाली परंपराओं का यह अनूठा प्रदेश आज सर्वांगीण विकास के नये आयामों को छू रहा है। खेल, शिक्षा, खाद्यान्न के क्षेत्रों में हरियाणा अग्रणी भूमिकाओं में सम्मिलित है। आज हरियाणा को आधुनिक भारतीय संस्कृति का आदर्श प्रारूप (मॉडल) कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हरियाणा साहित्य अकादमी व हरियाणा ग्रंथ अकादमी के कामकाज को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में वेबसाईट का शुभारंभ एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश की गौरवशाली साहित्यिक विरासत के साथ-साथ समकालीन रचनाशीलता के विविध आयाम अब वेबसाईट के माध्यम से लेखकों व शोधार्थियों के लिए सहज सुलभ हो सकेंगे। अकादमी की सभी योजनाओं व गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी की सहज उपलब्धता के फलस्वरूप इन योजनाओं में बड़े स्तर पर रचनाकारों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा विश्वविद्यालय स्तर पर विज्ञान व मानविकी विषयों में हिन्दी में तैयार मानक ग्रंथों तथा प्रदेश की कला, संस्कृति, इतिहास व लोक साहित्य से संबद्ध पुस्तकों की जानकारी विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए सहजरूप में उपलब्ध होगी।

                                      


                                                                                                                    डॉ. के. के. खंडेलवाल)

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